नई दिल्ली | केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के फार्माकोविजिलेंस (औषधि सतर्कता) योगदान में भारत 123वें स्थान से ऊपर उठकर वैश्विक स्तर पर 8वें स्थान पर पहुंच गया है।
वे नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय फार्माकोपिया 2026 (IP 2026) के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे, जो भारत की दवाओं के मानकों की आधिकारिक पुस्तक का 10वां संस्करण है।
उन्होंने कहा, “भारतीय फार्माकोपिया देश में दवाओं के मानकों की आधिकारिक पुस्तक के रूप में कार्य करती है और यह फार्मास्यूटिकल्स के लिए भारत के नियामक ढांचे का एक आधार स्तंभ है।”
नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) के तहत भारतीय औषधि सतर्कता कार्यक्रम (PvPI) की उल्लेखनीय प्रगति पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “2009-2014 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में योगदान के मामले में वैश्विक स्तर पर 123वें स्थान पर रहने वाला भारत अब 2025 में दुनिया भर में 8वें स्थान पर पहुंच गया है।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिससे मोनोग्राफ की कुल संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है।
नड्डा ने कहा, “एंटी-ट्यूबरकुलर, एंटी-डायबिटिक और एंटी-कैंसर दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट सहित प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों में कवरेज को काफी मजबूत किया गया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपयोग की जाने वाली दवाओं का अधिक व्यापक मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है।”


