नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना पहला बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल हुए। हजारों की संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा NEET-UG पेपर लीक, CBSE मूल्यांकन विवाद, CUET और SSC-GD जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को बताया गया।
अभिजीत दीपके शनिवार सुबह करीब 7:45 बजे अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट से बाहर आने में उन्हें लगभग एक घंटे का समय लगा। हालांकि देरी के कारणों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही दीपके ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुस्तक हाथ में उठाकर मीडिया से बातचीत की और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
दीपके ने कहा कि देश के लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र मानसिक दबाव में हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
जंतर-मंतर पर पहली बार उतरी CJP
कॉकरोच जनता पार्टी का यह पहला बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई CJP ने खुद को युवाओं की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया है। पार्टी का कहना है कि उसका आंदोलन किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर है।
प्रदर्शन स्थल पर हजारों युवा, छात्र और समर्थक मौजूद रहे। कई प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा, किताबें और पोस्टर लेकर पहुंचे। मंच से लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
समर्थकों के लिए जारी की गई थी गाइडलाइन
प्रदर्शन से पहले CJP ने अपने समर्थकों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की थी। इसमें लोगों से समय पर पहुंचने, धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन लगाने, नाश्ता करके आने और अपने साथ तिरंगा, फूल तथा किताबें लाने की अपील की गई थी। पार्टी ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने पर भी जोर दिया।

सोशल मीडिया पर बढ़ता प्रभाव
CJP की लोकप्रियता का बड़ा आधार सोशल मीडिया को माना जा रहा है। पार्टी का दावा है कि पिछले कुछ हफ्तों में उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। समर्थकों का कहना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के कारण संगठन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में कई जनआंदोलन तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाते हैं। हालांकि यह देखना बाकी है कि CJP भविष्य में औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में सामने आती है या केवल एक जनआंदोलन के रूप में अपनी भूमिका जारी रखती है।
क्या राजनीतिक पार्टी बनेगी CJP?
फिलहाल CJP ने खुद को औपचारिक राजनीतिक दल घोषित नहीं किया है। हालांकि उसके बढ़ते जनाधार और सोशल मीडिया प्रभाव को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। भारत की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां जनआंदोलनों ने बाद में राजनीतिक दल का रूप लिया और चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
CJP नेतृत्व का कहना है कि फिलहाल उनका प्राथमिक लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पार्टी का दावा है कि वह युवाओं की समस्याओं को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चलाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित आंदोलन
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने NEET-UG पेपर लीक, CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया, CUET और SSC-GD जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय इस आंदोलन की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं CJP ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।

