बांग्लादेश | बांग्लादेश ने लंबे समय से चर्चा में रही तीस्ता नदी परियोजना (Teesta River Project) के लिए चीन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना के लिए चीन करीब ₹7,000 करोड़ (लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराएगा। इस ऋण को लगभग 50 वर्षों की अवधि में चुकाने का प्रावधान बताया जा रहा है।
यह परियोजना उत्तरी बांग्लादेश में बाढ़ नियंत्रण, नदी तट संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। लंबे समय से इस परियोजना में भारत की संभावित भागीदारी की चर्चा होती रही थी, लेकिन अब चीन के साथ आगे बढ़ने के फैसले ने क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है।
क्या है तीस्ता परियोजना?
तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच वर्षों से बातचीत चल रही है। प्रस्तावित परियोजना के तहत नदी के किनारों का विकास, तटबंधों का निर्माण, सिंचाई क्षमता बढ़ाना, बाढ़ प्रबंधन और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग प्रमुख लक्ष्य हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद उत्तरी बांग्लादेश के कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है और बाढ़ से होने वाले नुकसान में भी कमी आने की संभावना है।
चीन की बढ़ती भूमिका
इस समझौते के तहत चीन केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देगा, बल्कि परियोजना के निर्माण और तकनीकी सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दक्षिण एशिया में चीन पहले से ही कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। ऐसे में तीस्ता परियोजना को भी उसकी क्षेत्रीय रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला बांग्लादेश के लिए आर्थिक विकास का अवसर हो सकता है, वहीं भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि तीस्ता नदी दोनों देशों के बीच जल कूटनीति का संवेदनशील विषय रही है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारा समझौता लंबे समय से लंबित है। ऐसे में चीन की इस परियोजना में बढ़ती भागीदारी भविष्य में क्षेत्रीय कूटनीति और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा और संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर रखेगा और दोनों देशों के बीच जल सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।
भू-राजनीतिक नजरिए से अहम फैसला
तीस्ता परियोजना पर चीन और बांग्लादेश की यह साझेदारी केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर का भी संकेत मानी जा रही है। अब इस परियोजना के क्रियान्वयन और इसके क्षेत्रीय प्रभावों पर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी रहेंगी।

