नई दिल्ली: छात्र आंदोलन के बीच CJP ने सरकार के सामने वार्ता को लेकर अपना स्पष्ट रुख रखा है। संगठन ने कहा है कि यदि सरकार बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या फिर किसी ऐसे Common Place (सार्वजनिक स्थान) पर बैठक आयोजित की जाए, जहां सभी पक्ष निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपनी बात रख सकें।
‘बंद कमरे की नहीं, खुली बातचीत चाहते हैं’
CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। ऐसे में बातचीत भी पारदर्शी माहौल में होनी चाहिए। संगठन का मानना है कि सार्वजनिक स्थान पर होने वाली बैठक से सभी पक्ष अपनी बात खुलकर रख सकेंगे और किसी प्रकार के भ्रम या विवाद की संभावना कम होगी।
सरकार से संवाद के लिए तैयार, लेकिन शर्तों के साथ
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह बातचीत से पीछे नहीं हट रहा है। CJP का कहना है कि वह समाधान के लिए सरकार से संवाद करने को तैयार है, लेकिन वार्ता ऐसी जगह होनी चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो। संगठन ने जंतर-मंतर या किसी अन्य साझा सार्वजनिक स्थान को इसके लिए उपयुक्त बताया है।
आंदोलन रहेगा जारी
CJP ने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का दावा है कि उनका उद्देश्य छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखना है और इसके लिए लोकतांत्रिक तरीकों का ही सहारा लिया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल सरकार की ओर से CJP के इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता निकलता है या आंदोलन और राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
मानसून सत्र के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम लगातार राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ऐसे में CJP की ओर से सार्वजनिक स्थान पर वार्ता की मांग ने इस पूरे मुद्दे को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

