नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने परिसर में आवारा कुत्तों के घूमने के मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर कोर्ट परिसर में कुत्तों की आवाजाही पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है। इसी दौरान न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या हम इनके मालिक हैं?”
अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वकील, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक आते हैं। ऐसे में आवारा कुत्तों की मौजूदगी सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि परिसर सुरक्षित और व्यवस्थित बना रहे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इस समस्या के समाधान के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी। साथ ही निर्देश दिया कि कोर्ट परिसर में आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस दिशा में समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। अदालत ने कहा कि न्यायालय परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा और व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, अदालत के निर्देशों के बाद अब सभी की नजर संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट की चिंता को दूर करने के लिए किस तरह के ठोस कदम उठाए जाते हैं।

