नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अब रफ्तार पकड़ ली है। केरल में तीन दिन की देरी से दस्तक देने के बाद मानसून कर्नाटक और तमिलनाडु को पार करते हुए गोवा तक पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में यह महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों और मुंबई तक भी पहुंच सकता है। हालांकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने केरल के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राज्य के कुछ हिस्सों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। रेड अलर्ट का मतलब है कि अगले 24 घंटों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है। भारी बारिश को देखते हुए वायनाड और कासरगोड जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। साथ ही ट्रेकिंग, पहाड़ी क्षेत्रों में रात्रि यात्रा और खनन गतिविधियों पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है।
गोवा तक पहुंचा मानसून, मुंबई में जल्द दस्तक की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल पणजी, बेंगलुरु, सलेम और पंबन समेत दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। मानसून की सक्रियता बढ़ने से गोवा में भी व्यापक वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं तो मानसून जल्द ही मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकता है।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में क्यों हो सकती है देरी?
मौसम विशेषज्ञ और स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष जी.पी. शर्मा के अनुसार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानसून को आगे बढ़ाने के लिए बंगाल की खाड़ी में एक मजबूत मौसम प्रणाली की आवश्यकता होती है। फिलहाल ऐसी कोई प्रभावी प्रणाली सक्रिय नहीं है। इसी कारण इन राज्यों में मानसून की गति धीमी पड़ सकती है और सामान्य समय से कुछ देरी संभव है।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के किसानों की निगाहें अब मानसून की अगली चाल पर टिकी हैं। दोनों राज्यों की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और खरीफ फसलों की बुवाई समय पर बारिश पर ही आधारित रहती है।
पूर्वोत्तर भारत में तेजी से बढ़ेगा मानसून
IMD के मुताबिक अगले तीन दिनों में मानसून असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच सकता है। वहीं अगले 10 दिनों में बिहार, झारखंड और ओडिशा में मानसून की एंट्री होने का अनुमान है।
हालांकि मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ क्षेत्रों में मानसून की प्रगति अस्थायी रूप से धीमी पड़ सकती है, जिससे राज्यों के बीच पहुंचने के समय में अंतर देखने को मिल सकता है।
केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट
शुक्रवार रात से हो रही लगातार बारिश के कारण केरल के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए हैं और जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। यहां 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका है।
वहीं तमिलनाडु के नीलगिरी, थेनी, डिंडीगुल और कोयंबटूर के पहाड़ी इलाकों में भी तेज आंधी, बिजली गिरने और अत्यधिक बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
प्री-मानसून एक्टिव, कई राज्यों में बारिश
गुजरात को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से आंधी और बारिश का दौर जारी है।
इन राज्यों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। प्री-मानसून बारिश के कारण तापमान में 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।
कुछ राज्यों में गर्मी का असर बरकरार
एक ओर जहां देश के कई हिस्सों में बारिश राहत लेकर आई है, वहीं कुछ राज्यों में गर्मी का प्रकोप जारी है। आंध्र प्रदेश में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा के आठ शहरों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी, बांदा, कानपुर और प्रयागराज में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। मौसम विभाग ने 9 जून के बाद कुछ क्षेत्रों में गर्मी की नई लहर चलने की संभावना भी जताई है।
अगले दो दिनों का मौसम
6 जून को केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना है। वहीं राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।
7 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और आंध्र प्रदेश में बारिश जारी रहने का अनुमान है। छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
देशभर में मानसून की प्रगति पर किसानों, व्यापारियों और आम जनता की नजर बनी हुई है, क्योंकि अच्छी बारिश का सीधा असर कृषि उत्पादन, जल भंडारण और खाद्य महंगाई पर पड़ता है।

