नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 500% टैरिफ लगाने से जुड़े प्रस्ताव को लेकर अपना रुख नरम किया है। यह प्रस्ताव उन देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़ा था जो रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद जारी रखे हुए हैं। ट्रंप के ताजा बयान के बाद भारत समेत कई देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हाल के दिनों में अमेरिकी संसद में एक ऐसा प्रस्ताव चर्चा में था, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता था। चूंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए इस प्रस्ताव का असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। 
हालांकि, अब डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस तरह के कठोर टैरिफ को लागू करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी विदेश नीति और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोगी देशों के साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 500% टैरिफ लागू होता, तो भारत से अमेरिका को होने वाले कई उत्पादों के निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता था। इससे इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य निर्यात क्षेत्रों को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। ट्रंप के बदले रुख से फिलहाल इन चिंताओं में कमी आई है। 
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के फैसले को भी भारत ने पूरी तरह व्यावसायिक और राष्ट्रीय आवश्यकता पर आधारित बताया है। भारत का कहना है कि ऊर्जा आयात को लेकर उसके निर्णय स्वतंत्र हैं और किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं लिए जाते। जानकारों के अनुसार, ट्रंप के इस रुख से भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में स्थिरता बनी रह सकती है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े टैरिफ विवाद से बचना दोनों देशों के हित में माना जा रहा है।
फिलहाल 500% टैरिफ को लेकर अंतिम नीति या कानून लागू नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप के नरम रुख ने भारत सहित कई देशों को राहत का संकेत दिया है। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस की आगे की कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

