नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के लिए मंगलवार का दिन मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन के लिए बेहद खास रहा। 33 साल की उम्र में उन्हें पहली बार टीम इंडिया की टेस्ट टीम में जगह मिली है। श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम में सारांश को चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह शामिल किया गया है।
सारांश जैन पिछले एक दशक से घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते आ रहे हैं। दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर और बाएं हाथ के बल्लेबाज सारांश ने रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, रेस्ट ऑफ इंडिया और इंडिया-ए के लिए दमदार खेल दिखाया। हाल ही में श्रीलंका ए दौरे पर उनके हरफनमौला प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका मिला।
सारांश की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। उनके परिवार ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई त्याग किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता कैंसर से जूझते रहे लेकिन बेटे के क्रिकेट करियर पर असर न पड़े, इसलिए उन्होंने अपनी बीमारी लंबे समय तक छिपाकर रखी। वहीं उनके बड़े भाई ने अपने क्रिकेट के सपने को पीछे छोड़कर सारांश के करियर को आगे बढ़ाने में पूरा साथ दिया।
मध्य प्रदेश के लिए 2014 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सारांश जैन ने घरेलू क्रिकेट में 180 से अधिक विकेट लेने के साथ 2,000 से ज्यादा रन भी बनाए हैं। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया के लिए इंतजार करना पड़ा, लेकिन आखिरकार 33 साल की उम्र में उनकी मेहनत रंग लाई।
अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें श्रीलंका दौरे पर टिकी हैं, जहां सारांश जैन को टेस्ट कैप मिलने की पूरी संभावना है। अगर उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो यह उनके लंबे संघर्ष, धैर्य और मेहनत का सबसे बड़ा इनाम होगा।

