आज के समय में लोग तुरंत राहत पाने के लिए पेनकिलर, इम्यूनिटी सप्लीमेंट और हर्बल उत्पादों का सहारा लेते हैं। ये चीजें सुरक्षित लगती हैं, लेकिन बिना नियंत्रण और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से शरीर के महत्वपूर्ण अंग लिवर पर छिपा हुआ नुकसान हो सकता है।
विश्व लिवर दिवस के अवसर पर डॉ. सोनल अस्थाना, लीड कंसल्टेंट – एचपीबी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, Aster RV Hospital ने बताया कि दवाओं से होने वाला लिवर डैमेज अब एक बढ़ती हुई समस्या बन चुका है, जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर रहा है और अक्सर शुरुआती चरण में नजर नहीं आता।
लिवर शरीर में प्रवेश करने वाले सभी पदार्थों—चाहे वे दवाएं हों या सप्लीमेंट—को प्रोसेस करता है। यह विषैले तत्वों को हटाकर उन्हें सुरक्षित रूप में बदलता है। लेकिन जब लोग जरूरत से ज्यादा दवाएं या सप्लीमेंट लेने लगते हैं, तो लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी डिटॉक्स क्षमता प्रभावित हो सकती है।
पैरासिटामोल दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से एक है। निर्धारित मात्रा में लेने पर यह सुरक्षित है, लेकिन अधिक मात्रा या लंबे समय तक उपयोग से लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है। पैरासिटामोल का ओवरडोज़ दुनिया में तीव्र लिवर फेल्योर के प्रमुख कारणों में शामिल है।
खतरा तब और बढ़ जाता है जब लोग अनजाने में एक जैसी सामग्री वाली कई दवाएं एक साथ लेते हैं या शराब के साथ इनका सेवन करते हैं। इसके अलावा, सप्लीमेंट्स को लेकर भी सावधानी जरूरी है। कई लोग “नेचुरल” या हर्बल उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं, जबकि इन पर सख्त नियंत्रण नहीं होता और इनमें ऐसे तत्व हो सकते हैं जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं।
वजन घटाने वाले उत्पाद, बॉडीबिल्डिंग सप्लीमेंट और कुछ पारंपरिक हर्बल फॉर्मूलेशन में ऐसे घटक पाए जा सकते हैं जो लिवर टॉक्सिसिटी का कारण बनते हैं। कुछ उत्पादों में भारी धातु या छिपे हुए रसायन भी मिल सकते हैं, जो जोखिम बढ़ाते हैं।
स्व-चिकित्सा (Self-medication) भी एक बड़ी समस्या है। लोग हल्के दर्द, थकान या अन्य सामान्य समस्याओं के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार दवाएं और सप्लीमेंट लेते रहते हैं, जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
लिवर डैमेज के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, जैसे थकान, मितली, भूख में कमी और हल्का पेट दर्द। गंभीर स्थिति में पीलिया, गहरे रंग का पेशाब और पेट में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
अच्छी बात यह है कि दवाओं से होने वाले अधिकांश लिवर नुकसान से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग दवाओं का उपयोग जिम्मेदारी से करें और निर्धारित मात्रा का पालन करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का संयोजन नहीं करना चाहिए।
उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए ताकि उसमें मौजूद सक्रिय तत्वों—जैसे पैरासिटामोल—की जानकारी मिल सके। ज्यादा सप्लीमेंट लेना बेहतर परिणाम नहीं देता, बल्कि नुकसान बढ़ा सकता है। किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से दवाएं ले रहे हैं।
नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। लिवर फंक्शन टेस्ट के जरिए शुरुआती स्तर पर ही समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से दवाएं या सप्लीमेंट लेते हैं, उनके लिए यह और भी जरूरी है।
दर्द निवारक और सप्लीमेंट स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन उनका सही तरीके से उपयोग करना आवश्यक है। लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है, लेकिन यह संवेदनशील भी है। इसलिए सही जीवनशैली, जागरूकता और जिम्मेदार उपयोग के जरिए ही लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है।

