मुंबई जैसी जगहों पर 40°C की बाहरी गर्मी से बार-बार 20°C के ठंडे, एयर-कंडीशंड माहौल में जाना आपके श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। आपकी नाक और श्वसन मार्ग की नाजुक परतें धीरे-धीरे तापमान बदलने के अनुकूल होती हैं, अचानक बदलाव के नहीं।
जब शरीर बहुत तेजी से ठंडा होता है, तो नाक की रक्त वाहिकाएं पहले सिकुड़ती हैं और फिर तेजी से फैलती हैं, जिससे वासोमोटर राइनाइटिस हो सकता है। इससे सूजन, ज्यादा म्यूकस बनना और सर्दी जैसे लक्षण—जैसे नाक बहना या बंद होना—हो सकते हैं, भले ही कोई संक्रमण न हो।
बार-बार ऐसे तापमान बदलाव का सामना करने से सिलिया (श्वसन मार्ग में मौजूद महीन बाल जैसे ढांचे) पर भी असर पड़ता है, जो धूल और कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करते हैं। समय के साथ यह सूजन पैदा कर सकता है, जो सर्दी जैसे लक्षण देती है, भले ही जांच में कुछ न निकले।
सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन की अतिरिक्त निदेशक डॉ. दिव्या गोपाल के अनुसार:
नमी और सूखी हवा
एयर कंडीशनर हवा को ठंडा करने के साथ उसकी नमी भी कम कर देता है। आदर्श रूप से घर के अंदर नमी 40% से 60% के बीच होनी चाहिए, लेकिन लंबे समय तक एसी चलने से यह 20–30% तक गिर सकती है।
सूखी हवा नाक की म्यूकस परत को डिहाइड्रेट कर देती है, जिससे वायरस और प्रदूषकों को रोकने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। जब यह प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर पड़ती है, तो वायरस आसानी से बढ़ सकते हैं, जिससे “समर कोल्ड” जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अक्सर लोग नोटिस करते हैं कि बाहर की नम हवा में जाने पर उनके लक्षण बेहतर हो जाते हैं।
एयर कंडीशनर की देखभाल जरूरी
सभी “समर कोल्ड” केवल तापमान के कारण नहीं होते। ठीक से मेंटेन न किए गए एसी के फिल्टर में धूल, पराग, फफूंदी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जो फिर हवा के साथ फैलते हैं।
ये कण एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं, जिससे लगातार छींक आना, थकान और नाक में जलन जैसे लक्षण होते हैं। इसलिए एसी की नियमित सर्विसिंग जरूरी है, वरना यह राहत देने के बजाय समस्या का कारण बन सकता है।
सुरक्षित तापमान कितना होना चाहिए?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि अंदर और बाहर के तापमान में अंतर 8–10°C से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर बाहर 40°C है, तो शुरुआत में एसी 28–30°C पर सेट करें। फिर धीरे-धीरे इसे 24–26°C तक लाएं, ताकि शरीर बिना तनाव के अनुकूल हो सके।
तेज गर्मी में एयर कंडीशनिंग जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ठंडक, सूखी हवा और खराब रखरखाव सर्दी जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। संतुलित तापमान बनाए रखना, एसी की नियमित सर्विसिंग और शरीर को समय देकर आप “समर कोल्ड” के खतरे को कम कर सकते हैं।
अगर लक्षण एक हफ्ते से ज्यादा बने रहें या बुखार और बदन दर्द के साथ हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

